Friday, March 8, 2013

नारी...Happy Woman's Day !!!



जन्म देती हो तुम जिंदगी को माँ बन के इस दुनिया मे,
माँ सी ममता और भावुकता नहीं किसी के अन्दर इस दुनिया मे,

माँ सा दुलार और एक दोस्त सा प्यार देती हो बहन के रूप मे,
करके शरारते और झगडे तुम फिर हो जाती भावुक पल भर मे,

जब दोस्ती का रिश्ता बनता है तुमसे, जीना अच्छा लगता है हमको, 
लगती तुम लडकियों के बिन जैसे सारी दुनिया खाली सी सबको, 

छोड़ के तुम जब अपना घर हमें और हमारे परिवार को अपनाती हो,
देती मिसाल फिर से बलिदान और संघर्ष की जब दुसरे घर आती हो,

जीवन मे आती जब तुम पत्नी बन के ये जीवन पूरा सा हो जाये,
प्यार दुलार और माँ सा ख्याल सब कुछ इस एक रिश्ते मे मिल जाये,

इस दुनिया मे है जितना प्यार और सुन्दरता वो सब है तुम्हारे ही दम से,
होगी सुरक्षा और सम्मान हर एक नारी का बस हमारे ही संकल्प से,

करना होगा ये प्रण हम सबको न हो कोई बलात्कार और न कोई भ्रूण हत्या हो,
हर नारी को अपने अधिकार मिले और हर जगह हर रिश्ते मे इनका सम्मान हो।

~कमलेश 

Friday, December 7, 2012

वो एक मुलाकात...



आ  बैठ  गई मेरे सामने वो थोड़ी सहमी थोड़ी घबराई सी,
 यु पल भर को बस नजरे उठाये पल भर मे शर्माती सी,

उसके होटों पर हंसी देख कर जैसे ये मन मचला जाये हैं ,
उसके ऊपर उसका अपने बालो को सवारना कहर सा ढाया जाये हैं,

बतया रही किसी और से वो पर लगता मुझसे बतया रही,
होटों से कुछ नहीं कह रही पर आखों से कोई कहानी सुना रही,

यु तो कभी मिले न थे हम न ही एक दूजे को देखा था,
न जाने पल भर मे  क्या हुआ क्यों जन्मो का रिश्ता लगता हैं,

जहा कही है पल रही एक ख़ुशी अभी इस दिल में,
वही  समाया है बिछड़ने का डर इस सफ़र की मंजिल पे,

यु तो कई बरसो लगते है एक अच्छे रिश्ते को बनने मे ,
पर न जाने कैसे बन गया ये प्यारा सा रिश्ता पल भर मे,

यु तो हमें हर दम जल्दी होती हैं पाने की अपनी मंजिल को,
पर न जाने क्यों है लग रहा की इसी सफ़र को चलते जाने दो...


~कमलेश 

Saturday, August 4, 2012

यारो के संग...





हर महफ़िल भी सुनी सी लगती है तुम यारो के बिन,
सुनी महफ़िल मे भी रंग आ जाते हैं तुम यारो के संग,

हर मंजिल भी अधूरी सी लगती हैं तुम यारो के बिन,
हर अधूरी मंजिल भी पूरी सी लगती हैं तुम यारो के संग,

खुशिया भी दुखो सी लगती है तुम यारो के बिन,
दुखो मे भी खुशिया मिल जाती जब होता हैं तुम यारो का संग,

उजाले रास्तो मैं भी अंधियारे नजर आते है तुम यारो के बिन,
अंधियारे रास्तो मे भी उम्मीद की किरण नजर आती है तुम यारो के संग, 

ये हसीं जिंदगी भी वीरान सी लगती है तुम यारो के बिन,
हो जाती है ये वीरान जिंदगी भी हसीं जब होता हैं तुम यारो का संग,

जी न पायेगे ये जिंदगी इस तरह कभी तुम यारो के बिन,
करता हूँ दुआ ऊपर वाले से की सदा बना रहे साथ मेरे तुम यारो का संग...

~कमलेश

Saturday, May 12, 2012

तेरे साथ...




जब करता हूँ तुझसे बाते,
न जाने कैसे ये वक़्त निकल जाता हैं,

जब थाम लू तेरा हाथ,
हर मुश्किल का हल नजर आता है,

तेरे लावो की हंसी को देख ,
मैं अपने सारे गमो को भूल जाता हूँ 

जब लगता तुझसे गले एक बार,
जैसे इस धरती पर जन्नत को पाता हूँ,

जब भी होता मैं साथ तेरे,
जैसे मैं खुद को पूरा होता पाता हूँ...

Sunday, April 22, 2012

एक छोटा सा ख़्वाब...





आज दिल करे इस चाँद को धरती पर खिंच लाऊ,
इसकी चांदनी को ओड़ कर मीठी सी नींद सो जाऊ,

इन चमकते सितारों को आज अपने सपनो मे सजाऊ,
इन  ठंडी हवा के झोको के संग बस बहता ही जाऊ,

इस रात के अंधेरो को चीर कर रौशनी की किरण लाऊ,
इस खुले साफ असमान मे आज बस मैं उड़ता ही जाऊ,

यु रात भर देखे सपनो को ही बस अपनी मंजिल बनाऊ,
फिर सुबह उठ कर सूरज की तरह सदा चमकते ही जाऊ,

आज दिल करे बस इन सारे ख़्वाबो को एक बार पूरा कर पाऊ,
और इस जिंदगी को खुशियों और सुकून  के साथ जी पाऊ...

Saturday, April 14, 2012

मेरा अक्स...



आज फिर पुछा मेरे चाहने वालो ने,
क्या दिल तोडा है तेरा कभी किसी खुदगर्ज ने,

ऐसा क्या दिखता है मेरी कविताओ मे,
जो मुझे ये लोग दिलजला आशिक समझ बेठे है,

बताओ जरा किस किताब मे लिखा है ऐसा,
की दिल की बातो को बाया करने के लिए जरुरी है दिल टूटना,

लोग कहते है आखिर किसके लिए लिखता है ये सब,
मैंने मुश्कुरा के कहाँ खुद के सुकून के लिए लिखता हूँ बस,

होते है बस अल्फाज़ा मेरे इन कविताओ मे,
पर नाइंसाफी है की मालिक किसी और को समझा जाता है इनका,

समझ नहीं आता की कैसे समझाऊ मैं इन सब को,
की आज भी तलाश है इन कविताओ को बस एक अनजान सी मंजिल की...