हर रोज सोचता
हूँ की तुझसे बात न करू,
पर जब तू सामने होती है तो ये दिल नहीं मानता,
यु तो सारा जमाना साथ है मेरे,
पर फिर भी तेरे साथ के बिना ये दिल नहीं मानता,
सोचता
हूँ कभी मोहबत न करूँगा तुझसे,
पर हल पल तुझे मोहबत किये बिना ये दिल नहीं मानता,
कब से तेरी यादो को भुला देना चाहता
हूँ,
पर हर पल तुझे याद किये बिना ये दिल नहीं मानता,
चाहे लाख बेवफाई कर ले तू मेरे साथ,
पर तेरे साथ बेवफाई करने को ये दिल नहीं मानता,
न जाने ऐसा क्या जादू किया तुने इस दिल पे ,
की तुझे इस दिल से निकालने को भी ये दिल नहीं मानता...




