Monday, January 30, 2012

ये दिल नहीं मानता...



हर रोज सोचता  हूँ की तुझसे बात न करू,
पर जब तू सामने होती है तो ये दिल नहीं मानता,

यु तो सारा जमाना साथ है मेरे,
पर फिर भी तेरे साथ के बिना ये दिल नहीं मानता,

सोचता  हूँ कभी मोहबत न करूँगा तुझसे,
पर हल पल तुझे मोहबत किये बिना ये दिल नहीं मानता,

कब से तेरी यादो को भुला देना चाहता  हूँ,
पर हर पल तुझे याद किये बिना ये दिल नहीं मानता,

चाहे लाख बेवफाई कर ले तू मेरे साथ,
पर तेरे साथ बेवफाई करने को ये दिल नहीं मानता,

न जाने ऐसा क्या जादू किया तुने इस दिल पे ,
की तुझे इस दिल से निकालने को भी ये दिल नहीं मानता...

Monday, January 16, 2012

पहचान ...



सूरज से सीखो खुद जल-जल कर हमेशा चमचमाते रहना,
चंदा से सीखो घोर अंधियारे मे भी रौशनी की किरण देना,

धरती से सीखो बिना रुके अपनी धुरी पर चलते रहना,
पेड़ो से सीखो खुद धुप मे जल कर ओरो को छाया देना,

क्यों हमको कोई सिखाएगा इन सब को कौन सिखाता है,
क्यों फिर हम किसी और के सिखाने का इंतजार करते है,

कुदरत के इतने करिश्मे है जो खुद व खुद ही चलते है,
चलने के लिए फिर क्यों हम किसी और की राह तकते है,

जरुरत है बस खुद मे दृढ़ निश्चय और तत्परता की,
फिर देखो सब सीखेगे और आसमाँ  को छु लेगे खुद ही....


Tuesday, January 10, 2012

वो हसीं बीते दिन...

दुनिया वालो की नजरो से बच कर,
वो तेरा मिलना छुप छुप कर,
फिर घंटो मेरे साथ बेठ कर,
दुनिया भर की बातो को करना,

देखना तेरा प्यार भरी नजरो से,
खेलना मेरा तेरी रेशमी जुल्फों से,
सोना मेरा तेरी गोद मे सर रख कर,
सहलाना फिर तेरा मेरे बालो को,

वो छोटी छोटी बातो पर लड़ना,
फिर खुद ही आखों  का भरना,
मेरे सिने पर सर रख कर,
जोर जोर से सिश्किया भरना,

एक बार गले जब तू लगती थी,
मेरे लवों पर लवों को रखती थी,
अपनी बाहों मे मुझको भरती थी,
जैसे धरती पर जन्नत पा ली थी.

शर्मना वो तेरा  मुझ से,
मुश्काना तेरा हलके से,
झुकाना फिर तेरा नजरो को,
सवारना तेरा अपनी जुल्फों को,

हमे पता न चलता था,
की कब वक़्त निकलता था,
और फिर आखिर मे जाते जाते,
न जाने क्यों दिल मचलता था,

कितने हसीं था जीवन का वो सफ़र,
जो हर पल तेरे साथ जिया मैंने,
तेरा हाथ जब होता था हाथ मेरे,
लगता थे की दुनिया को पा लिया मैंने,

लगता था बस तुझे नहीं पाया,
धरती पर खुदा को है पा लिया,
तेरी हर एक खुशी के लिए,
खुदा के दर पर सजदा किया,

कितना खुश मे रहता था,
जब तू मेरे संग रहती थी,
फिर लोटा दे वो मेरे बीते दिन,
जब खुशिया होती थी हर दिन...

तेरी यादे ...

दुनिया की न कोई थी खबर,
न खुद का था कोई वजूद,
गुम था मे तो बस अपने मे ही,
वजह न थी कुछ जीने की,

क्यों तुने दुनिया से मिलवाया,
क्यों मेरे वजूद को पहचाना,
क्यों तू मेरे जीवन मे आई,
क्यों जीन की राह दिखाई,

न तू मेरे जीवन मे आई होती,
न मुझको जीना सिखाई होती,
कुछ पल की खुशिया दे कर,
मुझको यु अकेले तनहा छोड़ गई,

क्यों खुदा ने ये जुर्म किया,
क्यों तुझको मुझसे दूर किया,
जब से तुने मुझसे मुह फेरा है,
लगता जैसे जीवन वीरान हुआ,

छोड़ दिया उसी मोड़ पर फिर मुझको,
मिली थी जिस मोड़ पर तू मुझको,
सिखाया हर पल मे जीना मुझको,
अब हर पल मे मरना सिखा रही,

अब बस हर पल तेरी यादे है,
उन यादो मे तेरी सूरत है,
पल पल घुट कर जीता हु,
अब तेरी यादो मे ही जीवन है....