Sunday, April 22, 2012

एक छोटा सा ख़्वाब...





आज दिल करे इस चाँद को धरती पर खिंच लाऊ,
इसकी चांदनी को ओड़ कर मीठी सी नींद सो जाऊ,

इन चमकते सितारों को आज अपने सपनो मे सजाऊ,
इन  ठंडी हवा के झोको के संग बस बहता ही जाऊ,

इस रात के अंधेरो को चीर कर रौशनी की किरण लाऊ,
इस खुले साफ असमान मे आज बस मैं उड़ता ही जाऊ,

यु रात भर देखे सपनो को ही बस अपनी मंजिल बनाऊ,
फिर सुबह उठ कर सूरज की तरह सदा चमकते ही जाऊ,

आज दिल करे बस इन सारे ख़्वाबो को एक बार पूरा कर पाऊ,
और इस जिंदगी को खुशियों और सुकून  के साथ जी पाऊ...

Saturday, April 14, 2012

मेरा अक्स...



आज फिर पुछा मेरे चाहने वालो ने,
क्या दिल तोडा है तेरा कभी किसी खुदगर्ज ने,

ऐसा क्या दिखता है मेरी कविताओ मे,
जो मुझे ये लोग दिलजला आशिक समझ बेठे है,

बताओ जरा किस किताब मे लिखा है ऐसा,
की दिल की बातो को बाया करने के लिए जरुरी है दिल टूटना,

लोग कहते है आखिर किसके लिए लिखता है ये सब,
मैंने मुश्कुरा के कहाँ खुद के सुकून के लिए लिखता हूँ बस,

होते है बस अल्फाज़ा मेरे इन कविताओ मे,
पर नाइंसाफी है की मालिक किसी और को समझा जाता है इनका,

समझ नहीं आता की कैसे समझाऊ मैं इन सब को,
की आज भी तलाश है इन कविताओ को बस एक अनजान सी मंजिल की...