Friday, December 7, 2012

वो एक मुलाकात...



आ  बैठ  गई मेरे सामने वो थोड़ी सहमी थोड़ी घबराई सी,
 यु पल भर को बस नजरे उठाये पल भर मे शर्माती सी,

उसके होटों पर हंसी देख कर जैसे ये मन मचला जाये हैं ,
उसके ऊपर उसका अपने बालो को सवारना कहर सा ढाया जाये हैं,

बतया रही किसी और से वो पर लगता मुझसे बतया रही,
होटों से कुछ नहीं कह रही पर आखों से कोई कहानी सुना रही,

यु तो कभी मिले न थे हम न ही एक दूजे को देखा था,
न जाने पल भर मे  क्या हुआ क्यों जन्मो का रिश्ता लगता हैं,

जहा कही है पल रही एक ख़ुशी अभी इस दिल में,
वही  समाया है बिछड़ने का डर इस सफ़र की मंजिल पे,

यु तो कई बरसो लगते है एक अच्छे रिश्ते को बनने मे ,
पर न जाने कैसे बन गया ये प्यारा सा रिश्ता पल भर मे,

यु तो हमें हर दम जल्दी होती हैं पाने की अपनी मंजिल को,
पर न जाने क्यों है लग रहा की इसी सफ़र को चलते जाने दो...


~कमलेश