दुनिया की न कोई थी खबर,न खुद का था कोई वजूद,
गुम था मे तो बस अपने मे ही,
वजह न थी कुछ जीने की,
क्यों तुने दुनिया से मिलवाया,
क्यों मेरे वजूद को पहचाना,
क्यों तू मेरे जीवन मे आई,
क्यों जीन की राह दिखाई,
न तू मेरे जीवन मे आई होती,
न मुझको जीना सिखाई होती,
कुछ पल की खुशिया दे कर,
मुझको यु अकेले तनहा छोड़ गई,
क्यों खुदा ने ये जुर्म किया,
क्यों तुझको मुझसे दूर किया,
जब से तुने मुझसे मुह फेरा है,
लगता जैसे जीवन वीरान हुआ,
छोड़ दिया उसी मोड़ पर फिर मुझको,
मिली थी जिस मोड़ पर तू मुझको,
सिखाया हर पल मे जीना मुझको,
अब हर पल मे मरना सिखा रही,
अब बस हर पल तेरी यादे है,
उन यादो मे तेरी सूरत है,
पल पल घुट कर जीता हु,
अब तेरी यादो मे ही जीवन है....
kisi ki yade .........
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