सूरज से सीखो खुद जल-जल कर हमेशा चमचमाते रहना,
चंदा से सीखो घोर अंधियारे मे भी रौशनी की किरण देना,
धरती से सीखो बिना रुके अपनी धुरी पर चलते रहना,
पेड़ो से सीखो खुद धुप मे जल कर ओरो को छाया देना,
क्यों हमको कोई सिखाएगा इन सब को कौन सिखाता है,
क्यों फिर हम किसी और के सिखाने का इंतजार करते है,
कुदरत के इतने करिश्मे है जो खुद व खुद ही चलते है,
चलने के लिए फिर क्यों हम किसी और की राह तकते है,
जरुरत है बस खुद मे दृढ़ निश्चय और तत्परता की,
फिर देखो सब सीखेगे और आसमाँ को छु लेगे खुद ही....

nice one......nature ki tarah he natural
ReplyDeleteThanks :)
Deletetitle to bda mast diya h .............
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