Monday, February 13, 2012

माँ...



दिया ऊपर वाले ने कितना अनमोल रिश्ता माँ तेरे रूप मे
जैसे पाया है धरती पर खुदा को ममता की मूरत के रूप मे,

एक अरसे तक ख़ुशी ख़ुशी खुद तकलीफों  से लड़ कर
दिया मुझे जीवन और पहचान अपनी कोख से जन्म दे कर,

मेरे जीवन की सासों को अपने प्यार और दुलार से सीच कर
बनाया इस काबिल के बिता सकू अपनी जिंदगी खुले आसमा के निचे जी कर,

कितने आराम से तुने समझा मेरी तुतलाती कही अनकही बातो को,
जैसे समझ लिया हो बिन कहे मेरे मन मे आने वाली हर एक  इच्छाओं को,

जब भी होती थी मुझे कोई तकलीफ या मेरी तबियत ख़राब
न जाने कैसे बिताई तुने पूरी राते बिना सोए मांगते हुए फरियाद,

अपने लाड़  दुलार और अच्छी परवरिश से बनाया मुझे इस काबिल आज
की मे पूरी कर सकू तेरी इन आखों मे दिखती मुझसे जुड़ी हर एक आस,

न जाने कौन से अच्छे  कर्मो का फल मिला मुझे इस जन्म मे
की लिया तेरी कोख से जन्म और पाया तुझको मैंने अपनी माँ के रूप मे,

बस अब तो दिल से एक ही है फरियाद मेरी इस भगवान के दर पर 
की दे पाऊ तुझे संसार की हर खुशिया और लू जन्म तेरी ही कोख से हर बार,

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