Monday, March 19, 2012

तेरी बदनसीबी...



मैं तो वैसे ही खुश था अकेला तनहा अपनी जिंदगी मे,
तुझे क्या भाया था मुझ मे जो आई तू मेरी जिंदगी मे,

याद है मुझे वो सारी कसमे जो तुने मेरे लिए खाई थी,
याद है मुझे वो तेरी हर अदा जो तुने मुझ पर गिराई थी,

कहा गई वो बाते जो तू बस मुझ से करा करती थी,
कहा गई वो दीवानी जो रात भर मेरे लिए जगा करती थी,

कितना नादान था मैं जो तेरे प्यार को समझ ही न पाया,
ये तो बस एक छलावा था जिसे मैंने पुरे दिल से निभाया,

तुने ही कहा था की मेरे बिना तेरी जिंदगी कुछ भी नहीं,
क्या बदल गया अब जो कहती है तू मेरा कुछ भी नहीं,

मुझे ये गम नहीं की तुने मुझ से  सच्चा प्यार न किया,
गम तो इस बात का है की तुने मेरा सच्चा प्यार खो दिया...

4 comments:

  1. Bahut badhiyaa dost.....keep it up!!

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  2. u show ur thought in very poetic manner.great job

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    1. Thanks :) I just made an effort. Hope to see more comments and feedback in the upcoming poems in future...:)

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